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बुधवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी ने एक संकीर्ण दायरे (साइडवेज़ चैनल) में कारोबार जारी रखा, जो 4-घंटे (4-Hour) के चार्ट पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मंगलवार को अमेरिका के जून महीने के महंगाई (Inflation) के आंकड़े जारी किए गए, जिनसे ट्रेडर्स को काफी उम्मीदें थीं। इसके अलावा, मंगलवार और बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के नए प्रमुख केविन वार्श ने अमेरिकी कांग्रेस में दो बार भाषण दिया। इन घटनाओं से भी बाजार को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन सवाल यह है कि बाजार की ये उम्मीदें क्या थीं, और क्या वे उचित थीं?
संक्षेप में कहें तो नहीं। बाजार की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, क्योंकि शुरुआत में ही उसे यह स्पष्ट नहीं था कि आखिर उसे उम्मीद किस बात की करनी चाहिए।
याद दिला दें कि एक महीने पहले केविन वार्श ने कहा था कि अमेरिका में महंगाई बहुत अधिक है, यह पिछले पांच वर्षों से लक्ष्य स्तर से ऊपर बनी हुई है और "इस पर कुछ करना होगा।" हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया था कि क्या कदम उठाए जाएंगे। बाजार ने तुरंत यह मान लिया कि उनका संकेत मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को और सख्त करने की ओर है। इसके बाद वर्ष के अंत तक ब्याज दर बढ़ने की संभावनाओं का अनुमान बढ़ा दिया गया और निवेशकों ने हॉकिश (Hawkish) नीति की तैयारी शुरू कर दी।
लेकिन इसके बाद घटनाक्रम बदल गया। मध्य पूर्व में तनाव कुछ समय के लिए कम हुआ, तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर तक वापस आ गईं और परिणामस्वरूप जून में अमेरिका की महंगाई घटकर 3.5% रह गई।
हालांकि, आगे महंगाई किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष फिर से तेज़ हो जाता है और आने वाले महीनों में होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो जाता है, तो यह लगभग तय है कि तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकती हैं। ऐसे में महंगाई में और गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
यहीं से स्थिति दिलचस्प हो जाती है। जून में हुई फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद बाजार को उम्मीद थी कि केविन वार्श कांग्रेस में लगभग यह संकेत देंगे कि मुख्य ब्याज दर (Key Interest Rate) बढ़ाई जाएगी, बल्कि कई बार बढ़ाई जा सकती है। लेकिन ऐसी उम्मीदें काफी भोली और अवास्तविक थीं।
यदि फेड वर्ष के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाता भी है, तो फिलहाल केविन वार्श स्वयं भी यह नहीं जानते। वास्तव में, दुनिया में कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष किस दिशा में जाएगा।
यदि कल डोनाल्ड ट्रंप यह घोषणा कर दें कि बातचीत फिर से शुरू हो गई है, तेहरान और वॉशिंगटन एक बार फिर युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं और होरमुज़ जलडमरूमध्य दोबारा खोल दिया जाएगा, तो स्वाभाविक रूप से तेल की कीमतें फिर गिरेंगी और जुलाई में महंगाई भी और धीमी हो सकती है। ऐसे में फेड को ब्याज दरें बढ़ाने की आवश्यकता ही क्यों पड़ेगी?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह अनिश्चित हो, तब केविन वार्श ऐसी मौद्रिक सख्ती (Policy Tightening) का संकेत, वादा या उल्लेख क्यों करें, जिसकी शायद आवश्यकता ही न पड़े और जिसका डोनाल्ड ट्रंप भी विरोध करते हों?
इसीलिए यह पूरी तरह स्वाभाविक और अनुमानित था कि फेड चेयरमैन की टिप्पणी एक महीने पहले दिए गए उनके बयान से अलग नहीं थी। फेड अभी भी किसी जल्दबाजी में नहीं है। महंगाई अभी भी ऊंची है, लेकिन फिलहाल इंतजार करना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
इस जानकारी का अमेरिकी डॉलर पर न तो सकारात्मक और न ही नकारात्मक प्रभाव पड़ा। यहां तक कि महंगाई के आंकड़ों पर, जिनके बाद शुरुआत में डॉलर में बिकवाली हुई थी, उनका असर भी जल्द ही खत्म हो गया।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि EUR/USD मुद्रा जोड़ी लगातार तीसरे सप्ताह भी एक सीमित दायरे (Flat Range) में कारोबार कर रही है। न तो डॉलर में कोई स्पष्ट मजबूती आ रही है और न ही यूरो में।
16 जुलाई तक पिछले 5 ट्रेडिंग दिनों में EUR/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Volatility) 56 पिप्स रही, जिसे "औसत" श्रेणी में माना जाता है। गुरुवार को इस मुद्रा जोड़ी के 1.1399 से 1.1511 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। ऊपरी लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channel) नीचे की ओर झुका हुआ है, जो गिरावट के रुझान (Downtrend) के जारी रहने का संकेत देता है।
वहीं, CCI (Commodity Channel Index) संकेतक ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और इसने दो बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergence) बनाए हैं, जो संकेत देते हैं कि मौजूदा गिरावट का रुझान समाप्त होने के करीब हो सकता है।
S1 – 1.1414
S2 – 1.1353
S3 – 1.1292
R1 – 1.1475
R2 – 1.1536
R3 – 1.1597
EUR/USD मुद्रा जोड़ी अभी भी गिरावट के रुझान (Downtrend) में बनी हुई है, जिसे व्यापक (Global) तेजी के रुझान के भीतर एक तकनीकी सुधार (Correction) माना जा सकता है। यह स्थिति दैनिक (Daily) और साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
डॉलर के लिए दीर्घकालिक मौलिक (Fundamental) माहौल अभी भी नकारात्मक है, लेकिन 2026 में पहले भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitics) और उसके बाद फेडरल रिजर्व के सख्त (Hawkish) रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन दिया है।
यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के नीचे बनी रहती है, तो शॉर्ट (Sell) पोज़िशन पर विचार किया जा सकता है, जिनके लक्ष्य 1.1372 और 1.1353 होंगे।
यदि कीमत मूविंग एवरेज के ऊपर चली जाती है, तो लॉन्ग (Buy) पोज़िशन 1.1475 और 1.1536 के लक्ष्य के साथ उपयुक्त मानी जाएगी।
फिलहाल बियर (Bears) बाजार पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं, जबकि EUR/USD लगातार तीसरे सप्ताह सीमित दायरे (Flat Range) में कारोबार कर रही है।